अंडुमन (हनुमान) से गिरा इसका नाम
कई शतकों से गुप्त रहा बंगसागर का ये द्वीपमान
ऐसा है ये विलोभनीय अंदमान
भारतमाता की शान, भारतमाता की शान
कालापानी से जाना है इसे हर बार
सात पहिये के तिली का यह के जेल के आकार
सक्त सजा, फाँसी, अनशन हुआ यहा अत्याचार
तेल की घानी में काम करते कई गिरे बीमार,लाचार
ना जीने की उमीद,न पलायन का साधन
बंद कमरा, एक खिड़की ना किसीसे संभाषण
खो बैठे कई अपना मानसिक संतुलन
ऐसी थी भरी क्रूरता फिरंगियों के मन
सावरकर, मोहित मोइत्रा ऐसे देशप्रेमियों ने ठाम लिया था मन में
इस क्रूर, निर्दयी, निष्ठुर फिरंगीयों से वे मिलकर लढ़े
आज भी इन वीर क्रांतिकारियों की ललकार गूंज उठती है पुरे देश में |
ऐसे शूर स्वतंत्रता सेनानियोंको अभिवादन दिल से, अभिवादन दिल से||
------ नम्रता हेमंत खैरे

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