रोज सोचते है, ठान लेते है दफन कर देंगे उस प्यार को... पर अकसर सच्ची आशिकी इतनी आसानी से भूली नहीं जाती..
वो रोज यादों में आते है, ख्वाबों का आशियाना सजाते है, और हम रोज तडपते है....
आँखे अकसर नम हो जाती है, दिल अकसर रो लेता है.. बडा जालीम बरताव करते है वो और हम फिर भी बेशरम की तरह उमीद रखते है, उनका इंतजार करते है.. यही मानकर, यही समझकर के फिर एक उजाला होगा, सूरज की किरणो से फिर अंधकार दूर होगा, फिर चिडियो की गुंज सूनने आएगी, फिर उनसे हमनवा होगी....
कैसे उनको भूल जाए, कैसे हम उन यादो को मिटा पाए, कैसे इस नादान दिल को समझाए के वो ऐसे ही है......
कर लेते है हम दिल्लगी, वो दिल तोडना ही जानते.. कर लेते है हम इझहार, प्यार.... वो कर देते है इन्कार...
हम ना करे कोई बेवफाई.. वो छोड देते है हमे अकेले.. फिर बस हम और हमारी तन्हाई.. बस हम और हमारी तन्हाई.... 😢
------ नम्रता खैरे
वो रोज यादों में आते है, ख्वाबों का आशियाना सजाते है, और हम रोज तडपते है....
आँखे अकसर नम हो जाती है, दिल अकसर रो लेता है.. बडा जालीम बरताव करते है वो और हम फिर भी बेशरम की तरह उमीद रखते है, उनका इंतजार करते है.. यही मानकर, यही समझकर के फिर एक उजाला होगा, सूरज की किरणो से फिर अंधकार दूर होगा, फिर चिडियो की गुंज सूनने आएगी, फिर उनसे हमनवा होगी....
कैसे उनको भूल जाए, कैसे हम उन यादो को मिटा पाए, कैसे इस नादान दिल को समझाए के वो ऐसे ही है......
कर लेते है हम दिल्लगी, वो दिल तोडना ही जानते.. कर लेते है हम इझहार, प्यार.... वो कर देते है इन्कार...
हम ना करे कोई बेवफाई.. वो छोड देते है हमे अकेले.. फिर बस हम और हमारी तन्हाई.. बस हम और हमारी तन्हाई.... 😢
------ नम्रता खैरे

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