Tuesday, October 31, 2017

अरमानों को पाने


*अरमानों को पाने*

मन में अरमान कई,
हासिल करना है उन्हे|
हौसला रखकर जी रही हुँ,
*उन अरमानों को पाने|*

हाथों में आयना नहीं,
है बस वहीं किताबे|
छोड दिया सजना-सवरना,
*उन अरमानों को पाने|*

बचपन कहीं खो गया,
खेलना-कुदना छुट गया|
मासुमियत को भूल गयी,
*उन अरमानों को पाने|*

छोड दिया घुमना-फिरना,
अपने दोस्तों से भी मिलना,
कर दिया नजरअंदाज उन्हे,
*उन अरमानों को पाने....*

छोड दिया बर्थडे मनाना,
और किसी शादी में जाना,
लगा दी पढ़ाई में अपनी जी-जान,
*उन अरमानों को पाने|*

ना दशहरा, ना दिवाली,
ना होली, ना रंगोली,
बस पढा़ई बन गयी हर त्योहार
*उन अरमानों को पाने|*

दुनिया से दुर हो गयी,
कई रिश्ते भूल गयी,
अकेलेपन को गले लगा दी
*उन अरमानों को पाने|*

पर फीर भी रखुँगी हौसला
जी-जान लगा दुँगी सारा,
कामयाबी के रास्ते चलुँगी
*उन अरमानों को पाके|*

जीत लुँगी, जी लुँगी,
बिखरे रिश्ते बना लुँगी
दुनिया में घुल-मिल जाउँगी
*उन अरमानों को पाके|*

खुद को में पहचान लुँगी,
खुद की पहचान बना दुँगी
माँ-पिता का नाम रोशन कर दुँगी !
*उन अरमानों को पाके...*
*उन अरमानों को पाके...*

नम्रता खैरे

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