Wednesday, November 01, 2017

तुम आने से पहले

तुम आने से पहले.....


तुम आने से पहले
चारों ओर अंधेरा सा था
ना कोई मंजिल ना रास्ता था
डर लग रहा था
कही लड़खड़ा न जाऊ
दर्द के इस घने अंधेरे में
कही घूम ना जाऊ
पर तुम आए रोशनी बनकर
प्यार भरा मौसम लेकर

तुम आने से पहले
आँखें दोनो सुक गई थी
सासें कहीं फूल गई थी
डर लग रहा था
कही डूब ना जाऊ
आसुओं के इस बाढ़ में
पर तुम आए किनारा बनकर
प्यार भरा मौसम लेकर

तुम आने से पहले
मन कही भटक गया था
दिल कही अटक गया था
डर लग रहा था
कही खो न जाउ
तपते रेगिस्तान में
कही जल ना जाउ
पर तुम आए बादल बनकर
प्यार भरा मौसम लेकर

तुम आने से पहले
जिंदगी बेरंग हुई थी
ना कोई हँसी, ना खुशी थी
डर लग रहा था
कही भावना दब न जाए
बेजान जिंदगी से
कही संवेदना खत्म ना हो जाए
पर तुम आए इंद्रधनुष बनकर
प्यार भरा मौसम लेकर

तुम आने से पहले
जीवन के राह में फिसल गई थी
दुख, दर्द में मसल गई थी
डर लग रहा था
कही डगमगा ना जाउ
दलदल के इस विशाल जाल में
कही फस ना जाउ
पर तुम आए सहारा बनकर
प्यार भरा मौसम लेकर

तुम आने से पहले
दुनिया से मैं छुप रही थी
खुदसे मैं भाग रही थी
डर लग रहा था
कही खुदको गवा ना दू
खुदके चेहरे से डरकर
आत्मसम्मान को ठेच पहुंचा न दू
पर तुम आए आयना बनकर
प्यार भरा मौसम लेकर


Every time I see you.....

Every time I see you
Just feel like seeing you..         

Every time I see you
I feel i am always near you..

Every time I see you
I feel lucky to have you

Every time I see you
I go happy and crazy for you

Every time I see you
I feel just to be with you

Every time I see you
I start caring for you

Every time I see you
Feel like kissing you

Every time I see you
I always feel for you

Every time I see you
I feel hour's talking to you

Every time I see you
I just feel sating ILU

Every time I see you
I feel so proud to find you

Every time I see you
I just want me and you

Every time I see you
I get closer and closer to you

Every time I see you
I newly start loving you

Every time I see you
I wish to marry you

Every time I see you
I owe me and my life for you......

यातना


रुईया कॉलेज मध्ये असताना एका कविते स्पर्धेत भाग घेतलेला..
तेव्हा आपण जी चिट्ठी निवडू त्यात असणारे 2 शब्द कवितेत आले पाहिजे असा नियम होता. मला आलेले शब्द होते पौर्णिमेचा चंद्र आणि ग्रहण, त्या प्रसंगी स्पर्धेत सुचलेली ही कविता. 

यातना

माझ्या आयुष्याला जणू ग्रहणच लागलंय
कधी असतो मी तो तर कधी होते ती
आयुष्यच माझं संपलंय तो-ती च्या चक्रव्यूहात
उमजेनास झालंय नक्की आहे तरी कोण मी?

कधी असतो मी पुल्लिंगी तर कधी मी स्त्रीलिंगी
हे सगळं कमी की काय म्हणून ठरवलं नपुसकलिंगी

एवढंच काय माझ्यासाठी आठवड्याचा एक दिवस ही ठेवला
पाची वापरून वाजणाऱ्या टाळ्यांचा प्रसार ही केला

प्रत्येक वेळी, प्रत्येक ठिकाणी माझा दुरावास केला
पौर्णिमेच्या शुभ्र चंद्राला काळा ग्रहण लागला

सगळीकडे प्रत्येकाने माझी नाचक्की केली
6 नंबर असल्याची नेम प्लेट माझ्या माथी लावली

नोकरी करायची म्हटली तरी तिथून माझी हकालपट्टी केली
2 रुपये द्या अशी भीक मागण्याची वेळ माझ्यावर आली

सगळ्यांसारखे दोन हात, दोन पाय देवाने मला ही दिले
मग का म्हणून पौर्णिमेच्या चंद्राला ग्रहण असे लागले?
का म्हणून पौर्णिमेच्या चंद्राला ग्रहण असे लागले?

नम्रता खैरे

Tuesday, October 31, 2017

मिलन

Embrace the nature..

मिलन

ये हवाएं गुनगुना रही है
ये फ़िज़ाएं मुस्कुरा रही है |
आघूश में भरकर ये
मानो मुझे गुदगुदा रही है ||

बंद आँखों के सामने खड़ी वो
पत्तों के आंचल से छु रही है
कानों के पास से गुजर रही है
मानो मेरा नाम पुकार रही है

लताओं का झुला बनाकर
वो झूल रही है
चुपके से देख रही है, शरमा रही है
मानो बरसों पुराना रिश्ता निभा रही है

झरने की तरह बरस रही है
अनघड़ पत्थरों को आकार दे रही है
में एक भटकता मुसाफिर
मानो मुझे वो राह दिखा रही है

जैसे नदी समुंदर में घुल रही है
चांदनी चांद को रिझा रही है
पत्तों को ओस भिगा रही है
मानो इसी तरह वो मुझे ललचा रही है

जैसे चातक बारिश में भीगने के लिए
मोर अपने पंख फैलाने के लिए
बादल मिटटी संग महकने के लिए
भवरा कली को चूमने के लिए
तरस रहे है,तड़प रहे है
एक दूजे के होने के लिए......

मानो उसी तरह वो बेताब है
मेरे और उसके मिलन के लिए.. मेरे और उसके मिलन के लिए .....

----- Namrata Khaire

तू रख हौसला

हर एक कदम आगे बढ़ा
कामयाबी के तरफ आगे बढ़ा
अपने मकसद में खो जा तू
उन सपनों को ना दे कोई आराम ।
जी ले तू, जीत ले तू
कर रोशन तू तेरा नाम
तू रख हौसला जिंदगी में
ना हौसले को दे विराम ।

क्या होगा, क्या न होगा
कैसे होगा, कब होगा
जीत लेगा या हारेगा
ये सोचना ना तेरा काम ।
खुद पे विश्वास और करम कर निष्काम
उचित फल फिर देगा अल्लाह-o-राम
तू रख हौसला जिंदगी में
ना हौसले को दे विराम ।

दुनिया से है अलग तू
खुदको अब पहचान ले तू
नए जन्म लिए बालक जैसे
बन जा तू बेनाम ।
रख भरोसा खुद पे तू
और करदे पूरा काम
तू रख हौसला जिंदगी में
ना हौसले को दे विराम ।

ना रुक तू, ना भटक तू
मन चल-बिचल न होने दे तू
भटक गया सो अटक गया
अपने इन्द्रियों को दे लगाम ।
अपने ख्वाबों को ना भूल तू
उसीको जी अब सुबह- शाम
तू रख हौसला जिंदगी में
ना हौसले को दे विराम.....

-- Namrata Khaire

प्यार नाचीज़ है


प्यार नाचीज़ है 

प्यार नाचीज़ है 
ये दिल कभी समझता नहीं 
समझता है 
पर संभलता नहीं 
 
अथला पानी में वो बार बार 
डुबकियाँ लगाना चाहता है 
नीचे पत्थरों को टकराकर 
खुदको चोट पहुँचाना चाहता है 

समझता है आगे एक दरिया है
फिर भी उसी में छलांग लगाना चाहता है 
हवा में तैरकर, थोड़ी ख़ुशी पाकर 
नीचे टकराना चाहता है 

अनजान हवा संग चलकर 
बर्फीली तूफानों में फसना चाहता है 
ठण्ड की सुनहरी धूप समझकर 
कड़ी धूप में जलना चाहता है 


झील का मीठा पानी समझकर 
समिंदर का पानी पीना चाहता है 
तपते रेगिस्तान में चलकर 
सराब की खोज पर निकलना चाहता है 

खुदको ही ना पहचानकर
प्यार की तलाश में भटकना चाहता है 
प्यार उसी के भीतर है ये भूलकर 
औरों को आखेटना चाहता है, औरों को आखेटना चाहता है 

प्यार नाचीज़ है 
ये दिल कभी समझता नहीं 
समझता है
पर संभलता नहीं ....................... 

अरमानों को पाने


*अरमानों को पाने*

मन में अरमान कई,
हासिल करना है उन्हे|
हौसला रखकर जी रही हुँ,
*उन अरमानों को पाने|*

हाथों में आयना नहीं,
है बस वहीं किताबे|
छोड दिया सजना-सवरना,
*उन अरमानों को पाने|*

बचपन कहीं खो गया,
खेलना-कुदना छुट गया|
मासुमियत को भूल गयी,
*उन अरमानों को पाने|*

छोड दिया घुमना-फिरना,
अपने दोस्तों से भी मिलना,
कर दिया नजरअंदाज उन्हे,
*उन अरमानों को पाने....*

छोड दिया बर्थडे मनाना,
और किसी शादी में जाना,
लगा दी पढ़ाई में अपनी जी-जान,
*उन अरमानों को पाने|*

ना दशहरा, ना दिवाली,
ना होली, ना रंगोली,
बस पढा़ई बन गयी हर त्योहार
*उन अरमानों को पाने|*

दुनिया से दुर हो गयी,
कई रिश्ते भूल गयी,
अकेलेपन को गले लगा दी
*उन अरमानों को पाने|*

पर फीर भी रखुँगी हौसला
जी-जान लगा दुँगी सारा,
कामयाबी के रास्ते चलुँगी
*उन अरमानों को पाके|*

जीत लुँगी, जी लुँगी,
बिखरे रिश्ते बना लुँगी
दुनिया में घुल-मिल जाउँगी
*उन अरमानों को पाके|*

खुद को में पहचान लुँगी,
खुद की पहचान बना दुँगी
माँ-पिता का नाम रोशन कर दुँगी !
*उन अरमानों को पाके...*
*उन अरमानों को पाके...*

नम्रता खैरे

Your smile.... 😊😊

YOUR SMILE

 I pass from near you
Just to see your smile
I make some vague reasons
And talk to you
Just to see your smile

I have lunch slowly
I have dinner slowly
Just to see your smile
I do not hurry things
Just to see your smile..

I keep quiet and listen you
Just to see your smile
I notice you without anyone's notice
Just to see your smile

I turn back and search you
Just to see your smile
I wish you good night and bye
Just to see your smile

You don't know how good I feel when you smile
You don't know in my dreams i see your smile
You don't know when I wake up I see your smile
You don't know I feel simply awesome
Recollecting your smile
You don't know what exactly it means to me when I see your smile

I lose all my tensions, I lose all my worries
I lose all my stress, i lose all my negativities
I feel cheerful, happy and simply marvelous
I feel joyful, blissful and stupendously fabulous
Just by remembering your smile

I am on seventh heaven and top of the world
I dance when no one's watching and give a swirl
I look in the mirror and blush a lot
You don't know what happiness your smile has brought.

Your smile cheers me
Your smile motivates me
Your smile inspires me
Your smile revitalises me
Your smile encourages me
That yes I have a reason to smile
And that's YOUR SMILE.. and that's YOUR SMILE..... 😊😊😊😊😊😊

खरे जीवन

खरे जीवन


एकदा प्रश्न पडला काय आहे माझे जीवन
प्रश्नाचे उत्तर मिळण्यासाठी देवाला गेले शरण

देवाने सांगितले,
जिथे होईल तुझे आयुष्य आनंदवन
तेच असेल तुझे खरे जीवन....

जिथे होईल प्रेमाचे सिंचन
जिथे जमतील आयुष्याचे ऋणानुबंधन
जिथे असेल बहरलेल्या प्रेमाचे वृंदावन
तेच असेल तुझे खरे जीवन....

जिथे भिडले समुद्राला गगन
जिथे संपूर्ण आयुष्य करशील अर्पण
जिथे असेल गर्द छायेतील सुंदरबन
तेच असेल तुझे खरे जीवन....

जिथे अर्पिले जाईल तन, मन, धन
जिथे हवेहवेसे वाटेल मरण
जिथे समर्पित करशील सारे जीवन
तेच असेल तुझे खरे जीवन....

देवाने घातलेलं हे खूप मोठं कोडं होतं
पण प्रश्नाचं उत्तर शोधणं गरजेचं होतं

मग,
खूप विचार केला, खूप विहार केला
खूप मनन केले, खूप चिंतन केले
ध्यानस्थ गेले, प्राणायाम केले
पुस्तकं वाचली, google search केले
दही दिशा फिरले, अनेक लोकांना भेटले
पण ह्या प्रश्नाचं उत्तर न मिळे

अहो,
Google वर उत्तर नाही पाहून प्रश्नंच पडे
समजेनासे झाले कसे सोडवू देवाचे कोडे

पुन्हा देवाचे नमन केले, परत त्याला शरण गेले
शेवटी सोप्या शब्दात त्याने कसेबसे सांगितले

तो म्हणाला,
अगं, एवढं सगळं करण्याची काय होती गरज
स्वतःच्या आत डोकावून तरी बघ....
खूप वेगळं आणि सुंदर दिसेल हे जग
जीवनाचं खरं उद्धिष्ट कळेल तुला मग....
आजूबाजूला फिरकून तरी बघ
डोळ्यातील चित्र स्वछ करून तरी बघ.....

अजूनही प्रश्नार्थक चिन्ह होतं चेहऱ्यावर
पाहून मला, देव हसला माझ्यावर....

मग म्हणाला,
अगं लोकांचं हसणं खिदळनं
लहानांचं खेळणं बागडणं
चिंब पावसात भिजणं आणि भिजवणं
हेच तुझे खरे जीवन..

वेळेवर गरजूला मदत करणं
जबाबदाऱ्या सांभाळून सर्व नाती जपणं
स्वतःबरोबर दुसऱ्यांची उन्नती करणं
हेच तुझे खरे जीवन...

न्याय करणं, अन्यायाला रोखणं
संकटांना हसत हसत सामोरं जाणं
दुसऱ्याला अन स्वतःला ओळखणं
हेच तुझे खरे जीवन....

आपलं ज्ञान दुसऱ्याबरोबर वाटणं
दुसऱ्याच्या दुःखात शामिल होणं
दुसऱ्या च्या आनंदात आनंद मानणं
हेच तुझे खरे जीवन......

नम्रता खैरे

ती व्यक्ती ------

ती व्यक्ती ------

आयुष्याच्या वळणावर एकदा तरी समस्या येतेच |
आणि ती आली की माणसाला ती Depression मध्ये नेतेच ||

आशा वेळी प्रत्येकाला वाटतं कुणीतरी आपल्या बरोबर असावं |
त्या व्यक्तीशी आपण आपल हे दुःख share करावं ||

हे सगळं सांगताना अलगदपणे आपल्या डोळ्यात पाणी यावं |
आणि हळूच आपण त्या व्यक्तीच्या मिठीत शिरावं ||

आपल्याला रडताना बघून त्या व्यक्तीनेही रडावं |
मग त्या व्यक्तीसाठी आपलं दुःख लपवून आपण खुदकन हसावं ||

त्या व्यक्तीशी बोलून अर्धा problem solve झाला असं वाटावं |
त्या व्यक्तीने ही मी असताना घाबरू नको असं आश्वासन द्यावं ||

आपल्यासाठी त्या व्यक्तीने वाटेल ते करावं  |
आणि आपण ही त्या व्यक्तीच्या सहवासात सतत रहावं ||

प्रत्येकाला वाटतं आपलं हे स्वप्न कधीतरी खरं व्हावं |
आयुष्याच्या एखाद्या वाटेवर कुणीतरी असं भेटावं ||

ही ईच्छा लवकरच पूर्ण होईल असं  कधीतरी देवाने ही सांगवं |
आपलं आयुष्य जगत असताना त्या व्यक्तीचं हळूच आगमन व्हावं ||

शेवट पर्यंत त्या व्यक्तीने आपल्या बरोबरच असावं |
कोणतंही संकट आलं तरी आपल्याला मदत करत रहावं ||

प्रत्येकाला वाटतं आपल्या आयुष्यात असं कुणीतरी खास असावं |
त्या व्यक्ती बरोबर आपण हसत हसत जगावं आणि हसत हसतच मरावं ||

---- नम्रता खैरे

Kelkar ची LIBRARY

Kelkar ची LIBRARY


Library ला म्हणतात विद्येचे स्थान
पण Kelkar च्या काही मुलांना नाही तिचा मान  

 Maths lecture नंतर होतं Patil सरांचं English
Mass bunking व्हावं हीच होती सगळ्यांची Wish

Light-fan बंद करून आम्ही गेलो Library मध्ये
विचार केला जाऊन तिथे वाचूया अभ्यासाचे धडे

पाऊस होता खूप खूप त्याचे गात होती मी गुणगान
काही वेळानंतर मात्र अभ्यास चालू केला मी छान

कधी नव्हे अभ्यासात मन माझे रमले
हे पाहून सगळ्यांचे डोळे अवाक होऊन थांबले

इतक्यात एक विचित्र गोष्ट माझ्या कानावर आली
तपासण्यासाठी ती, मी माझ्या मैत्रिणींकडे गेली

हताश होऊन आम्ही सगळे पाहत राहिलो नुसते
विचार करत राहिलो Library मध्ये काय काय होत असते

हात पकडला त्याने तिचा, तिने पकडला त्याचा
त्या मुला-मुलींची चालली होती Library मध्ये मौज मजा

Library ला या मुलांनी समजला आहे Disco
कारण इथे किस किसने किस किया है किसको

हे सर्व पाहून आम्ही लागलो जोरजोरात हसायला
अशीच काही मुले असतात कलंक  College ला

तो 80 minutes चा Cinema मी आयुष्यात नाही विसरणार
आजही लायब्रीत गेलो तरी तो प्रसंग आठवणार

सर्वांना सद्बुद्धी दे हीच मनापासून प्रार्थना देवाला
आजही लायब्ररीत गेलो तर आठवतो तो OSCAR WINNER CINEMA !!!!

-----नम्रता खैरे


जगण्याची उमेद..



जगण्याची उमेद

नको नकोसं झालं आहे हे आयुष्य आता |
हरवून गेल्या आहेत जगण्याची उमेद देणाऱ्या त्या वाटा ||

जीवनाचे हसरे, आनंदाचे क्षणच आपण कुठेतरी हरवून बसलोय |
कधी जिंकलो असताना देखील वाटतंय आपण  कायमचं हरलोय ||

हजारो लोक बाजूला असतानाही वाटतंय आपण एकटेच आहोत |
आयुष्याची रडगाणी कुणाला सांगायची हिम्मत मात्र नाही होत ||

विश्वासाने सगळं सांगून त्यांना प्रत्येकाने विश्वासघातच केला |
यापुढे आपलं कुणी नाही असा अनुभव मात्र आला ||

पडलो, हरलो, रडलो, एकटे पडलो, खचून गेलो कायमचे |
समोरच्याची चाल न बघता सगळे पत्ते उघडले जीवनाचे |लो |

त्यांचा कधी आपल्यावर विश्वास बसणार नाही, मग काय आहे ह्या जीवनाचा उपयोग |
मानसिक त्रासापेक्षाही खूप बरा आहे cancer सारखा भयानक रोग ||

एका छपराखाली राहून देखील आपलं अस्तित्व काय आहे |
जिवंत असतानाही मेलेल्या माणसासारखं जगणं मात्र आहे ||

म्हणूनच कधीतरी वाटतं डोकं आपटून फोडून टाकावा हा माथा |
किंवा जीवघेणा अपघात व्हावा रस्त्यावरून जाता जाता ||

railway track वर उभं राहून एकाद्या train ने उडवून टाकावं |
sea link वरून उडी  मारून पाण्यामध्ये बुडून जावं ||

कळतंच नाही की आता कशासाठी अन कुणासाठी जगायचंय |
देवाकडे पहिली इच्छा हीच की मला लवकरच मरायचंय |

नको नकोसं झालं आहे हे आयुष्य आता |
हरवून गेल्या कायमच्या, जगण्याची उमेद देणाऱ्या त्या वाटा ||

Saturday, August 19, 2017

आज़ादी

आज वो आज़ादी का जशन मना लेते है
हम आज भी उन यादों में कैद रहते है

उन्हें ये दिन, ये तारीख याद नही रहती
हम ये दिन, ये तारीख भूल नही पाते

उनके चेहरे पर खुशी की हँसी होती है
हमारे चेहरे पर दुख भरी मुस्कान होती है

वो खूब जी लेते है ये दिन, हर दिन
हम खूब रो लेते है ये दिन, हर दिन

वो सारे हसीन पलों को इतनी आसानी से भूल लेते है
हम आज भी उन्ही पलों को अक्सर जी लेते है,
उनसे आशियाना सजा लेते है.....

हम आज भी उन यादों में डूबे रहते है, कैद रहते है
और वो आज खुशी का माहौल बना लेते है, आज़ादी का जशन मना लेते है,
आज़ादी का जशन मना लेते है........

------  नम्रता



Friday, August 18, 2017

Blue Whale Game

         Everyday we are hearing cases of suicides by teenagers, addicted to #bluewhalegame.. Just tried what would be one of the reasons for a 15 year boy to end up his life..
                 ----- Namrata Khaire
       
          " Mummy, papa , I am sorry..  पण मला हे करावं लागेल. मी सुरू केलेला हा खेळ मला संपवावा लागेल.. ते बघत आहेत मला मम्मा, I am  sorry.. I am really sorry....
           पण माझी पण चूक नाही मम्मा, तुम्ही दोघं ऑफिस मधे जायचा, संध्याकाळी यायचा. मी शाळेतून यायचो दुपारी, खरंतर घरी यायला नकोसं वाटायचं. भीती वाटायची, कसं तरी व्हायचं..
म्हणून काहीना काही करत मी उशिरा घरी यायचो.. कधी मित्रांबरोबर खेळायचो, कधी बाईंना पुस्तकं लावायला मदत करायचो, कधी नाक्यावरच्या बसस्टॉप वर नुसतंच बसायचो, कधी झाडाची पाने तोडून काहीतरी सजवायचो, तर कधी फक्त रस्यावरचे दगड गोळा करायचो..
भर उन्हात पाठीवर इतकं ओझं उचलून जमेल तिथे हिंडायचो, बागडायचो, फिरायचो. पण पाय थकले की घरी यायचो.....
      
            घरी कुणीच नसायचं.. खूप शांतता असायची.. मी काही बोललो की माझाच आवाज घुमायचा.. असं वाटायचं कुणी आहे, खूप वाटायची गं मम्मा....
असं वाटायचं की ती शांतता मला खाऊन टाकेल आणि तो आवाजही मला दाबून टाकेल..
मला तुमची खूप आठवण यायची, गरज वाटायची.. मी डॅडू ला फोन लावायचो, पण मिटिंग बिटिंग मध्ये असायचो तो.. तू पण फोन नाही उचलायचीस, उचललास तर काम आहे सांगायचीस.. बाईंनी इतका सारा दिलेला होमवर्क करून घ्यायला पण तुम्ही नसायचा..
     शाळेला पण आम्ही रोबोट वाटतो का ग? Project book , class book, home book, text book, एका subject चे किती books.. सगळं उचलायचं एवढुश्या बॅग मध्ये, आम्ही पण एवढूसे, आणि जायचं शाळेत.. प्रत्येक subject चा किती होमवर्क, नाही केला तर punishment, टीचर किती बोलायची, रागवायची, मारायची.... मला नाही जायचं शाळेत..
       त्या दिवशी मी computer चालू केला. असंच काहीतरी search करताना मला Blue Whale game दिसला. pokemon Go सारखाच interesting आणि नवीन वाटला.. खेळलो काही दिवस.  Curiosity वाढली, ते नाही का म्हणत, virtual काय, reality काय तसं काहीतरी होतं.. रोज काय challenge असेल, ह्याची curiosity वाढत गेली, म्हणून शाळा सुटली की लगेच पळत घरी यायचो.. adventurous वाटत होतं सगळं.. शाळेपासून, भीतीपासून एकदम tension free वाटत होतं.....
     एक दिवशी तो blue whale मासा हातावर काढायचा होता. पेन्सिल पेन ने नाही, तर चाकू, blade सारख्या एखाद्या धारधार वस्तूने..  मला नव्हतं करायचं तसं, पण ते game वाले बघतात, आणि game असा मधेच सोडता येत नाही ना, म्हणून कसंतरी केलं, mumma, daddu, खूप दुखलं तेव्हा, खूप रक्त आलं, खूप रडलो मी.....
           पण mummy, daddy तुमचं लक्ष नाही गेलं का हो माझ्या हातावर? इतके busy कसे हो तुम्ही? मी दिवसभर काय करतो, इंटरनेट वर काय बघतो, शाळेत जातो का, test मध्ये किती marks आणतो, अभ्यास करतो की copy करून पास होतो हे कधी पाहिलंत का? खेळतो का, खेळताना मला कुठे लागतं का, दुखतं का, एवढा होमवर्क  मी कसा करतो कधीतरी बघा ना..
        Next year तर माझी दहावी आहे, कोणत्या क्लास ला पाठवायचं, 85 % च्या वर आणायचं, नंतर science आणि मग engineering ला पाठवायचं हे सगळं तुम्ही आधीच ठरवलं. पण क्लास ला जाऊन मला 85-90% मिळणार का? तुम्ही पण थोडंसं लक्ष द्या ना.. थोडासा time द्या ना......
एखादी सुट्टी घेऊन कधी बागेत फिरायला जाऊया, कधी एकत्र पाणी पुरी खाऊया, कधीतरी मज्जा पण करूया ना..
मला नकोय pokemon ची बॅग, chota bheem ची bottle, किंवा ती remote control car,  computer नको, इतका मोठा TV पण नको आणि हा game पण नको.. मला फक्त तुम्ही हवे आहात.. फक्त तुम्ही...


       आज Game चा last day आहे.. मला नाही खेळायचाय game, पण मला भीती वाटतेय त्यांची.. ते बघत आहेत मला, ते बघत आहेत..
मला game संपवावाच लागेल.. त्यासाठी मला स्वतःला संपवावं लागेल. I am sorry mummy, I  am sorry daddy..... I am sorry ...... love you both
तुमचाच........ 





Tanhayee

         रोज सोचते है, ठान लेते है दफन कर देंगे उस प्यार को... पर अकसर सच्ची आशिकी इतनी आसानी से भूली नहीं जाती..

         वो रोज यादों में आते है, ख्वाबों का आशियाना सजाते है, और हम रोज तडपते है....
          आँखे अकसर नम हो जाती है, दिल अकसर रो लेता है.. बडा जालीम बरताव करते है वो और हम फिर भी बेशरम की तरह उमीद रखते है, उनका इंतजार करते है.. यही मानकर, यही समझकर के फिर एक उजाला होगा, सूरज की किरणो से फिर अंधकार दूर होगा, फिर चिडियो की गुंज सूनने आएगी, फिर उनसे हमनवा होगी....

           कैसे उनको भूल जाए, कैसे हम उन यादो को मिटा पाए, कैसे इस नादान दिल को समझाए के वो ऐसे ही है......
          कर लेते है हम दिल्लगी, वो दिल तोडना ही जानते.. कर लेते है हम इझहार, प्यार.... वो कर देते है इन्कार...
हम ना करे कोई बेवफाई.. वो छोड देते है हमे अकेले.. फिर बस हम और हमारी तन्हाई.. बस हम और हमारी तन्हाई.... 😢



------  नम्रता खैरे

Wednesday, August 16, 2017


       कालच समजलं मानसिंग दादाने रात्री पत्र उशीजवळ ठेवलेलं आणि भर रात्री ते पत्र उंबरठ्या बाहेर पडलं. कदाचित आठवणींत गुंतलेलं, म्हणूनच अक्षरांना, वाक्यांना दुःख समजलं, ते गहिवरलं आणि ते निघालं......
      निरव शांतता, भयाण वाटणारा काळोख असला तरीही  रात्री एकटंच, आपली वाट शोधत, मजकूर योग्य त्या व्यक्तीपर्यंत पोहोचवायला, एकटंच निघालं की....

       आणि जे नेहमी घडतं तेच घडलं. आपण निघतो काम फत्ते करण्याच्या उद्देशाने पण कोणाला माहीत असतं नियतीने काय वाढून ठेवलंय पुढे.. सुख, दुःख, अनुभव, अनेक समस्या, अनेक परीक्षा ह्या जणू कमरेवर हात ठेवून तयारीनिशी पुढे उभ्या असतात.. पण ह्यावर मात केली, निभावलो तर सुख, नावलौकिक, गगनात न मावणारा असा आनंद.... पण हरलो, खचलो तर दुःखाचा डोंगर, डळमळीत आत्मविश्वास, आणि भूतकाळाच्या दलदलीत स्वतःला कोसत अगदी फसणं.... नियती परीक्षा ही पाहणारच, पण खचून न जाता त्यातून शिकणं, शहाणं होणं महत्वाचं....

         पत्राला अडचणी आल्या तसं काहीसं आपलं पण होतं ना.. आपल्याला पण अनेक अडचणी येतात। कधी घातक मित्ररूपी दवबिंदू त्यांचा शिडकावा करतात तर कधी आपले अस्तित्व मिटवण्यासाठी वादळ रुपी लोक भेटतात जे चुकीचा सल्ला देतात, दिशाहीन करतात। पण कधी अक्षरांना सूर्यप्रकाश दिसला तसा आपल्याला ही चांगले जिवलग मित्र, लोक भेटतात, जे रक्ताच्या नात्याही पलीकडे असतात. जणू आशेचा किरण दाखवत....

         थंडी, दवबिंदू पासून बचाव करण्यासाठी पत्राच्या घरच्यांनी गोलाकार उकारांनी, वेलांट्यानी आधार द्यायचा प्रयत्न केला, पण कितीकाळ? त्यांनाही एकाक्षणी साथ सोडावी लागते.... आपलं पण असंच होतं...
       कधी कोणी जिवलग साथ सोडून जातो तर कधी कोणी जिवलग साथ सोडून देतो.......
     
        आयुष्य हे जणू रंगमंच, प्रत्येकाची आपली एक भूमिका, ती पार पडली की निघणं भाग आहे.. पण नाटक संपेपर्यंत पडदा पडे पर्यंत, आपली भूमिका आपल्याला निभवावी लागते, आणि पुन्हा निघावं लागतं पत्रासारखच, राहिला तो मजकूर पोहचवण्यासाठी , एकटंच, आपल्या स्वत्वाच्या प्रवासासाठी, येणाऱ्या अडचणींवर मात करत,  अनुभव पदरात घेत, शिकत..  सारं एकटंच.......


With reference to-
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---- Namrata Khaire